एनटीपीसी रिहंद में श्रमिकों का हंगामा, CISF पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप
बीजपुर, सोनभद्र। जनपद सोनभद्र के बीजपुर क्षेत्र स्थित एनटीपीसी रिहंद परियोजना में सोमवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब पावर टानिक्स कंपनी के श्रमिकों ने CISF एवं विजिलेंस कर्मियों पर मारपीट और दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया। सैकड़ों मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की। घटना के बाद परियोजना क्षेत्र में पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा।
केबल चोरी के संदेह से शुरू हुआ विवाद
श्रमिकों के अनुसार शनिवार को प्लांट परिसर के भीतर केबल चोरी के संदेह को लेकर कुछ मजदूरों से पूछताछ की गई। आरोप है कि पूछताछ के दौरान कुछ सुरक्षा कर्मियों ने बंद कमरे में श्रमिकों के साथ हाथापाई की और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
मजदूरों का कहना है कि उनसे कठोर तरीके से पूछताछ की गई, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। इस घटना से श्रमिकों में गहरा आक्रोश उत्पन्न हो गया।
अवकाश के बाद फिर हुआ विवाद
बताया गया कि रविवार को अवकाश होने के कारण संबंधित श्रमिक अपने घर चले गए। सोमवार सुबह जब वे ड्यूटी पर पहुंचने के लिए मैटेरियल गेट पहुंचे, तो कथित रूप से कुछ कर्मियों ने उन्हें पहचान कर दोबारा धमकाया।
इस घटना से नाराज श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने गेट पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में मजदूर मौके पर पहुंच गए और परियोजना परिसर के बाहर नारेबाजी शुरू हो गई।
“हम निर्दोष हैं” — श्रमिकों का दावा
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने कहा कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं और बिना किसी ठोस साक्ष्य के उन पर चोरी का आरोप लगाया गया। उनका आरोप है कि केवल संदेह के आधार पर उनके साथ मारपीट करना और अपमानजनक व्यवहार करना अन्यायपूर्ण है।
श्रमिकों ने कहा कि किसी भी संदिग्ध मामले में निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि मजदूरों के साथ बल प्रयोग किया जाना चाहिए।
मीडिया से बात करने से रोकने का आरोप
श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे मीडिया के सामने अपनी बात रखने का प्रयास कर रहे थे, तब उन्हें रोकने और धक्का-मुक्की करने की कोशिश की गई।
मजदूरों का कहना है कि वे अपनी बात शांतिपूर्वक रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा करने से भी रोका गया। इस आरोप के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
सैकड़ों श्रमिक पहुंचे बीजपुर थाने
विवाद बढ़ने पर सोमवार सुबह करीब 11 बजे सैकड़ों मजदूर बीजपुर थाने पहुंच गए। उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
श्रमिकों ने थाने में स्पष्ट कहा कि वे सम्मानजनक व्यवहार और न्याय चाहते हैं। उनका कहना था कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
पुलिस ने दिया जांच का आश्वासन
बीजपुर थाना प्रभारी राजेश सिंह ने श्रमिकों को आश्वस्त किया कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि लिखित तहरीर मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के आश्वासन के बाद श्रमिकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई।
सार्वजनिक माफी की मांग
श्रमिकों ने मांग की कि जिन लोगों ने कथित रूप से उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया है, वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका कहना है कि सम्मान और गरिमा हर श्रमिक का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण किसी को अपराधी मान लेना और उसके साथ अपमानजनक व्यवहार करना स्वीकार्य नहीं है।
परियोजना क्षेत्र में बना तनावपूर्ण माहौल
घटना के बाद एनटीपीसी रिहंद परियोजना और आसपास के क्षेत्रों में पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा। श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
कई लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और संवाद बेहतर होना चाहिए, ताकि इस प्रकार की परिस्थितियां उत्पन्न न हों।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक CISF, विजिलेंस या संबंधित प्रबंधन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई थी। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
श्रमिक सम्मान और औद्योगिक वातावरण का प्रश्न
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की सफलता श्रमिकों और प्रबंधन के बीच विश्वास पर निर्भर करती है। यदि श्रमिकों को अपमान या भय का अनुभव हो, तो कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हो सकता है।
निष्कर्ष
एनटीपीसी रिहंद परियोजना में श्रमिकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच उत्पन्न यह विवाद श्रमिक सम्मान, सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मामले का समाधान शीघ्र और पारदर्शी ढंग से नहीं हुआ, तो यह विवाद आगे और गंभीर रूप ले सकता है।

