राजस्थान में पुलिस हिरासत में मौतों पर सख्ती: डीजीपी ने जारी की नई गाइडलाइन, थानों में बढ़ेगी जवाबदेही

Sumit Singh
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जयपुर/उदयपुर। राजस्थान में पुलिस हिरासत के दौरान होने वाली मौतों और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी थानों के लिए नई और सख्त गाइडलाइन जारी की है। इस पहल का उद्देश्य हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पुलिस की जवाबदेही को मजबूत करना है।


नई गाइडलाइन के तहत गिरफ्तारी के तुरंत बाद व्यक्ति की मेडिकल जांच अनिवार्य की गई है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर चोट के निशान हों, वह बीमार हो या नशे की स्थिति में हो, तो उसका विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर हिरासत के दौरान दोबारा मेडिकल परीक्षण भी कराया जाएगा।


पुलिस मुख्यालय ने थानों में लगे CCTV कैमरों की नियमित निगरानी और फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। पूछताछ के दौरान किसी भी प्रकार के अमानवीय व्यवहार, मारपीट या प्रताड़ना पर पूरी तरह रोक लगाने को कहा गया है।


इसके अलावा गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को तुरंत देने, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसके अधिकारों की जानकारी देने तथा लॉकअप का नियमित निरीक्षण करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है। यदि किसी थाने में हिरासत के दौरान मौत या गंभीर प्रताड़ना की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।


राजस्थान में पिछले दो वर्षों के दौरान पुलिस हिरासत में मौत के 21 मामले सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। राज्य पुलिस का मानना है कि नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

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