जांच में क्या सामने आया?
राजस्थान में उपभोक्ता मामलों और विधिक माप विज्ञान विभाग की जांच के दौरान जयपुर और आसपास के कई पेट्रोल पंपों पर अनियमितताएँ पाई गईं। निरीक्षण के दौरान कुछ नोज़लों से तय मात्रा से कम ईंधन निकलता पाया गया। इसके बाद संबंधित नोज़लों को सील किया गया और जुर्माना भी लगाया गया।
2 लीटर से कम ईंधन भरवाने पर क्यों बढ़ जाता है जोखिम?
विशेषज्ञों के अनुसार:
बहुत कम मात्रा में ईंधन भरवाने पर अंतर को समझना कठिन होता है।
वाहन के फ्यूल मीटर में छोटा बदलाव स्पष्ट नहीं दिखता।
उपभोक्ता अक्सर जल्दबाज़ी में माप की पुष्टि नहीं कर पाते।
बार-बार छोटी मात्रा में ईंधन भरवाने पर कुल नुकसान अधिक हो सकता है।
उपभोक्ता कैसे करें बचाव?
संभव हो तो 2 लीटर या उससे अधिक ईंधन भरवाएँ।
मीटर को शून्य से शुरू होते देखें।
संदिग्ध स्थिति में 5 लीटर माप परीक्षण की मांग करें।
हमेशा रसीद लें।
किसी गड़बड़ी की शिकायत संबंधित विभाग या उपभोक्ता हेल्पलाइन पर करें।
सरकार का सख्त रुख
राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को सही माप-तौल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोषी पाए जाने वाले पेट्रोल पंपों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
जयपुर में सामने आए इस मामले ने यह संकेत दिया है कि ईंधन भरवाते समय सतर्क रहना बेहद आवश्यक है। विशेष रूप से कम मात्रा में पेट्रोल या डीजल भरवाते समय उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की आर्थिक हानि से बचा जा सके.
